if (window.top.location.href !== window.self.location.href && !window.top.location.href.startsWith('https://mail.swargarohan.org/')) { window.top.location.href = window.self.location.href; }

Swargarohan | સ્વર્ગારોહણ

Danta Road, Ambaji 385110
Gujarat INDIA
Ph: +91-96015-81921

आजकल देवीदेवता के आवेशवाले कई लोग मिल जाते है । इनमें कौन सच्चा है और कौन जूठा ये बताना मुश्किल है । मेरी मानो तो ज्यादातर लोग जूठे है । मौकापरस्त लोग अपने निहित स्वार्थ के लिये आवेश का बहाना करके लोगों को ठगते है । कोई अपने हाथों से कुमकुम निकालता है, कोई संतान या नौकरी के लिये आशीर्वाद देता है, तो कोई भूतभावि की बातें बताकर लोगों को प्रभावित करता है ।

जब हम जगन्नाथपुरी में थे तो हमारी धर्मशाला में कोलकता से कुछ स्त्रीयाँ आयी थी । वे हमारे बगलवाले कमरे में ठहरी थी । उनको मालूम पडा की हम हिमालय से आ रहे है, तो वो हमें मिलने आयी । आकर बताने लगी की उनमें से एक स्त्री को माताजी का आवेश आता है । उसके हाथ से कुमकुम निकलता है । वो अपने आपको भाग्यशाली समज रही थी की उसके साथ रहकर उसकी सेवा करने का मौका मिला था ।

दुनिया में भात-भात के लोग है । हमने उनकी बातों पर खास ध्यान नहीं दिया । एक दिन वो स्त्री हमारे कमरे के बाहर बैठकर सर हिलाने लगी, जोर से बोलने लगी और भजन गाने लगी । उसके हाथ से कंकु निकल रहा था । कुछ लोग उसे प्रसाद मानकर ले रहे थे, अपने आपको धन्य मान रहे थे । ये सब देखने के बाद भी हमें कोई कुतूहल नहीं हुआ ।

एक दफा, जब कुछ लोग मुझे मिलने आये थे, वो मेरे कमरे में आयी और ये सब कब और कैसे शुरु हुआ ये बताने लगी । उसने कहा की कोलकता के श्रीमंत मारवाडी लोग उसकी पूजा करते है । उसे रहने के लिये एक मकान भी दिया है । मैंने उसकी बातों में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई । उसकी आँखे बता रही थी की वो दंभी है ।
उसके साथ आयी दो-तीन बहनों के आग्रह से एक दफा माताजी उसके पास गयी और कंकु का प्रसाद ले आयी ।

मैंने माताजी को कहा: 'मुझे ये स्त्री ढोंगी लगती है, इसमें सच्चाई का अंश नहीं है । फिर भी आपको परीक्षा करनी हो तो आवेश आने पर उसे प्रश्न पूछो । आपको तसल्ली हो जायेगी । कंकु का देवीदेवता से कोई संबंध नहीं है । इसमें आश्चर्यचकित होने जैसा कुछ नहीं है ।'

जिस दिन हम जगन्नाथपुरी से निकल रहे थे, उसी दिन कोलकता से आयी स्त्रीयाँ वापिस जा रही थी । मैं सामान तैयार करके गाडी बुलाने गया । जब वापिस लौटा तो उनके कमरे का दृश्य देखा । माताजी का आवेश आने पर वो सर हिला रही थी, काँप रही थी, आसपास लोग जमा हो गये थे, और कुमकुम की प्रसादी ले रहे थे । माताजी वहाँ थी इसलिये मैं माताजी को बुलाने गया तो उसने मेरी ओर दृष्टिपात किया और तुरन्त नजर घुमा ली । मुझे फौरन पता चल गया की वो ढोंग कर रही है ।

मैंने माताजी को कहा, 'चलो, गाडी आ गयी है ।'
मैंने माताजी को इशारा किया की ये सही वक्त है, पूछकर तसल्ली कर लो ।

माताजी बोले 'मुझे एक प्रश्न पूछना है ।'
'हाँ हाँ, क्यूँ नहीं ? पूछो जो पूछना हो ।' उसने उत्तर दिया ।

'मेरी लडकी को बच्चा होनेवाला है । उसकी तबियत ठीक नहीं रहती । क्या आप बता सकती है की वो कैसी है ? पिछले कुछ दिनों से उसकी कोई खबर नहीं आयी है ।' माताजीने कहा ।

वो बोली, 'उसकी फिकर आप मत करो । बीच में उसकी तबियत कुछ बीगड गयी थी मगर अब सब ठीकठाक है । दो-तीन महिने बाद उसको बच्चा होगा ।'

माताजी को यकीन हो गया की वो जूठ बोल रही है क्योंकि ताराबेन का खत आया था । पंद्रह दिन पहले उनको पुत्री हुई थी और दोनों की तबियत ठीक थी । अब कुछ कहने-सुनने की जरूरत नहीं रही ।

We use cookies

We use cookies on our website. Some of them are essential for the operation of the site, while others help us to improve this site and the user experience (tracking cookies). You can decide for yourself whether you want to allow cookies or not. Please note that if you reject them, you may not be able to use all the functionalities of the site.